कशमकश

कशमकश

जब ज़िन्दगी की कशमकश ने हैरान कर दिया
मन को अपने किसी तरह से तैयार कर लिया
हमराह थे जो हाथ छुड़ा कर कहीं दूर जा बसे
राहों के फूल पत्थरों से हमने प्यार कर लिया
चाँद सितारों की महफ़िलें रोज़ लगती ही रहीं
थोड़ा सा सिरहाना खिड़की के पास कर लिया
दरवाज़े पर दस्तक की बाट कब तक जोहते
ख़ुशनुमा यादों में अपना टाइम पास कर लिया

*हरीश ममगाईं *

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