प्यार
प्यार
प्यार क्या है सोचता हूँ
चलते हुए क़दमों की मस्ती
या मन मे घुलती मिठास
आँखों मे निखरती हुई बहार
या दिल मे एक गहरा सुकून
तन मे छाई मखमली सांझ
इठलाके उतरता हसीन झरना
प्यार तू चुपके से आता है
सब चैन चुरा लेता है
तू सर्पीली पहाड़ी सड़क है
या मदमस्त कोई झील
तू एक भरपूर नींद है
या सुहाना कोई स्वप्न
तुझे अब क्या नाम दूं
तू अनंत की डोर है
तूने ही सबको पिरोया हुआ
तू ही रात, तू ही भोर है
तेरा ठिकाना है सब जगह
तेरा जलवा सब ओर है
© हरीश ममगाईं
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