बेटी

बेटी

क्या बताएं कैसी होती हैं बेटियाँ
ख़ुद की जान से प्यारी होती हैं बेटियाँ
फूलों की पंखुड़ियों सी होती हैं बेटियाँ
हॄदय की धड़कन सी थिरकती हैं बेटियाँ
दूर होती हैं तो बहुत याद आती हैं बेटियाँ
माँ को मन का हर राज़ बताती हैं बेटियाँ
पिता के हर दर्द को हर लेती हैं बेटियाँ
घर घर को फूलों सा महकाती हैं बेटियाँ
पँख फैला कर आसमाँ छू लेती हैं बेटियाँ
संसार में स्वयं को ख़ूब चमकाती हैं बेटियाँ
प्यार को सीने में संजोए रखती हैं बेटियाँ
सम्मुख निर्झर सी खिलखिलाती हैं बेटियाँ
ख़ुश रहें तो मन में अमृत बरसाती हैं बेटियाँ
व्यथित यदि हों तो बहुत रुलाती हैं बेटियाँ
आवाज़ दो तो तुरंत दौड़ पड़ती हैं बेटियाँ
सुख दुःख हर राह में मौजूद रहती हैं बेटियाँ
क्यों लोग कहते हैं परायी हो जाती हैं बेटियाँ
दिल के दरीचे के पास सदा रहती हैं बेटियाँ

© हरीश ममगाईं 

टिप्पणियाँ

  1. शानदार ममगाईं जी। जारी राखा डिजिटल संगरे वास्ता या पोर्टल उचित च। फॉलोवर टैब नि दिखणु आपक ब्लॉग पर मि फॉलो कन चाणु छै।

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